तुमने ही बर्बाद किया
तुमने ही बर्बाद किया
तू ही तो हमे बनाएगा
दफन हो गई सभ्यता
खुद ही समझ जाएगा
अपनी पूजन की देहरी
निष्प्राण तू रख पाएगा
गूँजेंगी चीखे मनुज की
खुद को कैसे निभाएगा
खुद को सिद्ध करने को
कब तक हमे भरमाएगा
गड्डम–गड्ड हुई संस्कृति
आस्था क्या बिखराएगा
मन्त्र्दीप पुष्पदीप पूजन
कैसे तू इसे बिसराएगा
न छोड़ा बच्चे को भी
अब कैसे आँख मिलाएगा
यादें रह गई, यादों मे चीखें
अब और क्या दिखलाएगा
-----------------------------तुमने ही बर्बाद किया
-----------------------------तू ही तो हमे बनाएगा
गुनेश्वर
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