नदानियों की वो हद पार कर गया
वो तो बातों से तीर मार कर गया
जिगर का जख्म आज दिखाया हमने
बड़ी बेदर्दी से तार तार कर गया
इतराते थे उसकी शोख हँसी पर
हर वो खुशी को ही इन्कार कर गया
ये ज़िंदगी बोझ लगने लगी है अब
बदनामियाँ सारी वो वार कर गया
ये मित्र रुसवाइयों को गले लगा ले
हमारा वजूद ही बेकार कर गया
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