धर्म के पहरेदार बहुत हैं यहाँ
मिन्नतों के बाज़ार बहुत हैं यहाँ
कोख की मर्यादा,ताक पर रखते
ऐसे -ऐसे रिश्तेदार बहुत हैं यहाँ
कोख की भृकुटी तनने से पहले
वार करते इजज्तदार बहुत हैं यहाँ
निछावर कर देती अस्मत मित्रता मे
न मालूम था बहरूपिये यार बहुत हैं यहाँ
धमाको की राख़ चन्दन की तरह लगाते
ऐसे कमीने कमजर्फ गद्दार बहुत हैं यहाँ
दो और दो पाँच का वित्त बनाते,सीखाते
ऐसे ऐसे बेहतरीन चमत्कार बहुत हैं यहाँ
भभूत दे बाहों मे कैद के लिए लालायित
ऐसे भी तो पाखंडी मक्कार बहुत हैं यहाँ
गुनेश्वर
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