मेरी गलियों मे, तेरा आना जाना हुआ
क्या फिर से मुहब्बत, निभाना हुआ
मुझसे रूठ कर, चले गए थे, तुम कहीं
प्यार का मेरे, न तुमसे, भूलाना हुआ
आग तो इधर भी बराबर ही लगी है
तुम्हें देखे हुए इधर भी जमाना हुआ
क्यूँ ईस तरह तकरार की सरहदों मे रहें
प्यार का नया न कोई भी तराना हुआ
आओ ,आ भी जाओ न फिर एक बार
कई दीनो से दुनिया को न जलाना हुआ
गुनेश्वर
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