Wednesday, 3 July 2013

कभी निखर जाना मेरी याद मे

कभी निखर जाना मेरी याद मे
खुद ही चली आना मेरी याद मे

बैठा मिलुंगा मैं एक शब्द लिए
छुना और शरमाना मेरी याद मे

छुकर हौले से गुजर जाएंगी हवा
तन्हा दुपट्टा गिराना मेरी याद मे

नम आँखों मे सर्द हथेलियाँ रख
नया एहसास पाना मेरी याद मे

नजर का टीका जो लगे गालों पर
आज फिर सँवर जाना मेरी याद मे

मुद्दतों गुजरी है खिलखिलाए हुए
हँसी की बारिश सजाना मेरी याद मे

कैद तुम भी हो और कैद मैं भी
तस्वीर से निभाना मेरी याद मे
गुनेश्वर

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