कभी निखर जाना मेरी याद मे
कभी निखर जाना मेरी याद मे
खुद ही चली आना मेरी याद मे
बैठा मिलुंगा मैं एक शब्द लिए
छुना और शरमाना मेरी याद मे
छुकर हौले से गुजर जाएंगी हवा
तन्हा दुपट्टा गिराना मेरी याद मे
नम आँखों मे सर्द हथेलियाँ रख
नया एहसास पाना मेरी याद मे
नजर का टीका जो लगे गालों पर
आज फिर सँवर जाना मेरी याद मे
मुद्दतों गुजरी है खिलखिलाए हुए
हँसी की बारिश सजाना मेरी याद मे
कैद तुम भी हो और कैद मैं भी
तस्वीर से निभाना मेरी याद मे
गुनेश्वर
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