Wednesday, 3 July 2013

ज़िंदगी के ख्वाब बना रहा हूँ
खुद को माहताब बना रहा हूँ

शोलों मे दिल है रखा हमारा
दिल को आफताब बना रहा हूँ

रुखसत कर दूँ तन्हाइयाँ मैं
ऐसा जमीने ख़ाब बना रहा हूँ

अंजुरी मे गंगाजल रख कर
हौसलों का सैलाब बना रहा हूँ

रास्ता है बहुत कठिन मित्र
प्रेमसरिता नायाब बना रहा हूँ

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