रसिकता लमपट हो ही जाती है
आप सादगी से प्यार किया करें
अधरों पर आपकी ये जो हँसी है
आप नजरों से इकरार किया करें
काँपती उँगलियाँ लटों मे उलझी हैं
लीनता पर आप एतबार किया करें
शिकन न हो माथे की बिंदीया पर
आँखों मे सजा इजहार किया करें
शाने पर जुल्फों का जन्मदिन हो
प्रेम के कारवें का इंतज़ार किया करें
गुनेश्वर
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