Monday, 22 July 2013


रसिकता लमपट हो ही जाती है
आप सादगी से प्यार किया करें

अधरों पर आपकी ये जो हँसी है
आप नजरों से इकरार किया करें

काँपती उँगलियाँ लटों मे उलझी हैं
लीनता पर आप एतबार किया करें

शिकन न हो माथे की बिंदीया पर
आँखों मे सजा इजहार किया करें

शाने पर जुल्फों का जन्मदिन हो
प्रेम के कारवें का इंतज़ार किया करें
गुनेश्वर

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