हादसों ने बड़ी शिद्दत से संभाला है मुझे
मैं हमेशा जिंदा रहूँ ऐसा ही ढाला है मुझे
कई-कई लम्हे तन्हाइयों ने घेरा है मुझे
मुक्कद्दस जज्बे ने गमों से निकाला है मुझे
एहसासों को भींच लिया था मैं डरते डरते
मेरी अदा को वो कहते हैं मार डाला है मुझे
चाहा बहुत मैं अपनों मे अपना बन कर रहूँ
छु न जाये परछाईं मेरी,उन्होने टाला है मुझे
जिस्मानी खूबसूरती की नहीं चाह है मुझे
बस उनकी दिलकश हँसी ने पाला है मुझे
गुनेश्वर
No comments:
Post a Comment