अपने खयालों की इक किताब देना
वो पुराने खतों का भी हिसाब देना
रूसवाइयों का डर लगा रहता है
फिर से मुझे वही पुराना शबाब देना
मैं खाविंद के भरोसे मे रहना चाहती हूँ
मुझे नई ज़िंदगी का तोहफा नायाब देना
प्यार की सरहदें अलग, मजबूरीयाँ अलग
मैं सुकून से रहूँ, मुझे ये आफताब देना
तुम जानते हो मैं संगदील नहीं
तुम सुकून मे हो बस इसका जवाब देना
गुनेश्वर
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