रो रो कर तो उसका बहुत बुरा हाल हो गया
सब कहते हैं शर्म से चेहरा लाल हो गया
आने का कह गए पिया,नही आ पाये सीमा से
खबर भी नहीं,न पत्र ही,ये कैसा हाल हो गया
आस लिए खुशी से रात भर न सोती थी बेचारी
रक्षक, न आए अबतलक,और दस साल हो गया
हम सब घरों मे अपने खुशियों मे मशगूल हैं
उसकी उन आँखों मे रो-रो कर जाल हो गया
अब तो कोई बता दे खाविंद जिंदा है या मुर्दा
सुख कर तो जिस्म उसका खाल हो गया
रफ्ता रफ्ता कट जाएगी यह ज़िंदगी भी उसकी
व्यवस्था देश की उसके लिए गर्तो-गाल हो गया
जो पता चला जिंदा है, अब तक खाविंद पड़ोस मे
द्वारे खड़ी राह तकते उसका इंतकाल हो गया
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