क्यों फिर से मुझे गमों ने घेरा है
प्यार ने क्या फिर से मुह फेरा है
बड़ी मुश्किलों से टूट कर जुड़ा हूँ
लगता है,जहाँ मे,नहीं कोई मेरा है
मिटाने की हद तक मिटाया गया
कहतें हैं, क्या बचा है,क्या तेरा है
खुल कर नही आया कोई सामने
हर दिन इंतजार मे,हुआ सवेरा है
सोचते रहे,डूब जाऊँगा,एकाकी मैं
अब तक ऐसा,नही कोई लुटेरा है
गुनेश्वर
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