न निगाहों ने इस कदर लूटा है
अपना वजूद पलकों से ढापूँ कैसे
होठों की उनकी वो हल्की-सी नमी
अपने भीगे होठों से मैं मापूँ कैसे
वो मुस्कुराती आवारगी तो देखो
उस आवारा मन को तापूँ कैसे
दिल बेकल हुआ जा रहा है आज
उसकी यादों की नींद मे कापूँ कैसे
इश्क इश्क हुआ जा रहा मन मेरा
हर वक्त उसी का नाम जापूँ कैसे
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