क्यों रोकते हो मुझे, मेरे ही अरमान सजाने से
तुम तो डरते हो, मुझे भी डराते हो, जमाने से
कोख को मैं अपने, कितने जतन से पाल रहीं हूँ
कैसे आदम हो डरते हो,इस बात को निभाने से
मुर्गे, बकरा, भेड़, गाय काट खाते हो बड़ी बेदर्दी से
दफन हो जाएगी यदि बेटी है, भागते हो, टकराने से
नहीं उगेगी कभी पौध, इस धरा पर मुहब्बत की
कितने बेदर्द हो नहीं डरते, कोख को मिटाने से
दहलीज पर घर की कौन लुढ़काएगा, चाँवल सगुन का
मन मे यह भय है तुम्हारे, छिपते फिरते हो जताने से
मेरे कमीज मे बटन टाँक देना,यह बात क्या कह पाओगे
क्यों नहीं समझते,तुम आदम,हर बार तुम्हें समझाने से
सगुन की मिठाई,पान के पत्ते पर सुपारी ,किसके लिए रखोगे
इस बात को मानो, कुछ होगा क्या इससे,खुद ही झुठलाने से
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