अब तो ज़िंदगी की बस एक तस्वीर बनाना बाकी है
कोई तो मिले और कहे मुहब्बत निभाना अभी बाकी
क्रोध का रुद्राक्ष लपटे शेर का बाल ताबीज मे बांधे
ऐसे अजब इंसान को मुहब्बत समझाना अभी बाकी है
न समझ पाया सार तत्व गीता रामायण महाभारत का
आज मानव मन के अंदर तो मुहब्बत जमाना बाकी है
कृष्ण ने की थी सहायता द्रौपदी की,लुट तो तब भी गई
न कुरेदो उस संस्कृति को,अपनी संस्कृति बचाना बाकी है
सत्तासीन तो अंधा तब भी था, ऊपर से तुर्रा गांधारी का
इतिहास खुद को दुहराता है,क्या संजय का आना बाकी है
यह गंगा को दिया श्राप था या देवव्रत का भीष्म प्रलाप
कलयुग का हुआ शुरवात किस-किस को बताना बाकी है
गुनेश्वर
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