कहतें हैं पथ्थर सी सूरत है तू
बेहतरीन न सही खूबसूरत है तू
तेरी जानिब रहूँ मैं, तू हाँ कह दे
बहुत प्यारी भली सी सीरत है तू
न-मालूम मुहब्बत किसे कहते हैं
मुझे लगता है मेरी जरूरत है तू
चंद अल्फ़ाजों मे संवार दूँ तुझको
पहली मुहब्बत की मुहूरत है तू
न सोच अब कुछ, आ साथ चल
मेरे मन मंदिर की मूरत है तू
गुनेश्वर
No comments:
Post a Comment