जातिगत संघर्षों मे मित्र अब विराम कहाँ
दास्तान है संघर्षों का, आराम कहाँ
डूबता रहा,शताब्दियों मे, शाम कहाँ
निर्वाह कब तक, कसक की अन्त्येष्टि
रक्त धमनियों मे जाम है, नाम कहाँ
रिक्तता समृद्धि है,अंतस का आर्तनांद सुन
सार्थकता शोकाकुल,खुशियों का पैगाम कहाँ
हरीतिमा का हस्तांतरण, कंक्रीट मे पैवस्त
रासायनिक रक्त, शुक्राणुओं का धाम कहाँ
ईर्ष्या का एश्वर्य और वासना का मधुमास
जातिगत संघर्षों मे मित्र अब विराम कहाँ
गुनेश्वर
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