ज़िंदगी के यकीं मे
जरूरतों की बारिश बहुत है||
कोशिशों की रातों मे
गुजारिशों की साजिश बहुत है
गुमनामी के खुशबू मे
उम्मीदों की ख्वाहीश बहुत है
कतरा-कतरा सब्र मे
शैतानों की नवाज़िश बहुत है
मोम बन के रहने मे
मानवता की नुमाइश बहुत है
लुट जाने की राह मे
हरेक की फरमाइश बहुत है
मित्र तेरी जुस्तजू मे
ज़िंदगी की पैमाइश बहुत है
गुनेश्वर
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