खूबसूरत सी गजलों के मानिंद रहो
तुम गजाला हो फूलों की मानिंद रहो
यह शुभ दिन आए जीवन मे बार बार
तुम सृष्टि मे खुशबू की मानिंद रहो
हर खुशी तुम्हारी परछाई बन कर चले
तुम धूप मे शीतल चाँदनी के मानिंद रहो
साहित्य सृजन की कलात्मकता मे बसी रहो
सृजनात्मक सुगंधित स्याही की मानिंद रहो
ढ़ोल नगाड़े भी आज बज उठेंगे खुद-ब-खुद
हर आवाज मे गीत और संगीत के मानिंद रहो
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