गुंजायमान है मन का कोना कोना
अब क्यों है प्यारे मौन का बिछौना
तल्खियाँ सारी सुप्त हो गई शायद
फिर किस बात का यूँ रोना धोना
आधुनिक तकनीक का देखो संघर्ष
बंजर मे भी उग आता अब सोना
इसी तकनीक का तांडव भी झेलो
सब पर है बारूद का पूरा भगोना
खदेड़ो दंगा फसाद अब इस धरा से
मित्र हमरा मन तो है छौना छौना
गुनेश्वर
No comments:
Post a Comment